Friday, January 22, 2010

MAIN TO BAADAL HOON..

एक लहराता सा आज़ाद आँचल हूँ 
मैं तो बादल हूँ 


सांझ कि सहेली हूँ 
चंदा से भी खेली हूँ 
ये सब मेरे दोस्त हैं
मैं कहाँ अकेली हूँ 


कभी जो प्यार आया तो
बन के अमृत बरसी हूँ
कोई जो आ टकराया तो 
गिरा के बिजली गरजी हूँ


किसी ने जो मुझे थामना चाहा 
एक ठंडा सा एहसास बन के उसपे छाई 
लेकिन अगर कैद कर के मुट्ठी में बांधना चाहा 
जब उसने मुट्ठी खोली तो खाली पायी


एक बहकाता सा काजल हूँ
मैं तो बादल हूँ 


हावाएं मेरा ठिकाना हैं
जहाँ ये ले जाएँ वहीँ मुझे जाना है
एक जगह कब ठहरी हूँ
मुझे  तो सारे जग पे छाना है


न किसी कि सुनती हूँ न किसी से कुछ कहती हूँ
बस अपनी ही धुन में बहती हूँ
जिनकी चाहत हूँ, उनका सपना हूँ
और जो नहीं समझे हैं,उनके लिए पहेली हूँ


हाँ थोड़ी सी पागल हूँ
मैं तो बादल हूँ 1063066_f520.jpg (520×390)













1 comment:

  1. Nice picture shivani ! do you know one of my hobby is photography,you can see and visit my another blog http://gaintbook.blogspot.com
    from:srinivas.gemini@gmail.com
    india

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